Sadhana Shahi

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अलमारी का भूत, प्रतियोगिता हेतु-05-Feb-2024

दिनांक- 05-0 2- 2024 दिवस- सोमवार प्रदत्त विषय- ##अलमारी का भूत प्रतियोगिता हेतु

रुपम हॉस्टल में गया। उसके हॉस्टल के कमरे में कोई अलमारी नहीं था, जिसकी वज़ह से उसे सामान रखने में बड़ी दिक्कत होती थी। लेकिन उसके पास इतने पैसे नहीं थे कि वह अलमारी खरीद सके। एक दिन वह बाज़ार गया बाज़ार में उसने एक अलमारी देखा जिसकी कीमत मात्र ₹1000 थी। पहले तो रुपम को विश्वास नहीं हुआ, फिर उसने दुकानदार से जाकर पूछा, तो दुकानदार ने भी उसका रेट 1000 ही बताया। रूपम को लगा अलमारी अच्छी और सस्ती भी है, इसे खरीद लेना चाहिए। फलस्वरुप रूपम अलमारी को खरीदकर हॉस्टल में ले आया। हाॅस्टल में उसने सारे कपड़े अलमारी में सेट करके रख दिया।कुछ दिन बीता रूपम का रूममेट घर चला गया और रूपम अकेले कमरे में था। अचानक अलमारी से अजीबों-गरीब आवाज़ आने लगी। रूपम इधर-उधर देखा कहीं भी कुछ भी नहीं था। वह आवाज़ की दिशा में जाने लगा। जब वह अलमारी के समीप पहुँचा तो देखा आवाज़ अलमारी से ही आ रही थी। उसने जैसे अलमारी खोला अलमारी के अंदर से दो हाथ निकला और उसने रूपम को अलमारी के अंदर खींच लिया। उसके कुछ ही देर पश्चात रूपम किसी और ही दुनिया में पहुंँच गया था। जहांँ चारों तरफ़ छत-विक्षत शव,हड्डियांँ,खू़न बिखरा हुआ था। वहांँ उल्टे पैर वाले मर्द थे। जिनकी आंँखों से ज्वाला निकल रही थी।रूपम यह सब देखकर डर गया। तभी उसमें से एक भूत ने कहा तुम हमें देखकर डरो नहीं हम लोग भी तुम्हारी तरह ही यहांँ पर इस अलमारी की वज़ह से ही आए हैं। यहांँ पर जितने भी भूत हैं सबको अलमारी ही लेकर आई है। रुपम ने पूछा, लेकिन यह अलमारी क्यों ऐसा करती है? क्यों सबको यहांँ इस गंदी दुनिया में लेकर आ जाती है ? तब एक भूत ने कहा, जिस तरह से मनुष्य अपना समाज बनाना चाहता है उसी तरह से भूत भी अपना समाज बनाना चाहते हैं। पहले यहाँ मात्र दो भूत रहते थे धीरे- धीरे इस अलमारी की वज़ह से यहांँ पर भूतों का बसेरा बढ़ता गया। तब रूपम ने कहा, लेकिन यह भूत अपना बसेरा क्यों बढ़ा रहे हैं। तब वहांँ निवास करने वाले भूतों ने बताया कि दरअसल वह अलमारी ही भूतिया है। वह अलमारी एक सेठ की है जिसमें उसने एक 10 साल के बच्चे को मार कर बंद कर दिया था। और अगले दिन वह अलमारी बेचने के बहाने लेकर बाहर निकाला उसमें से शव फेंक दिया और अलमारी को फर्नीचर की दुकान में बेच दिया।उसके बाद से जो भी उस अलमारी को खरीदा वह यहांँ पहुंँच गया। रूपम ने पूछा, आख़िर उसने बच्चे को क्यों मारा? तब भूतों ने बताया वह आदमी उस बच्चों की मांँ के साथ दुष्कर्म कर रहा था। बच्चे ने देख लिया और वह बाहर सबको बताने के लिए जाने लगा। तभी उसने बच्चे को पकड़ कर मार डाला और उसकी मांँ के साथ दुष्कर्म करके, उसके साथ जबरदस्ती ब्याह रचा लिया।रुपम बहुत दुखी था, उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करे। उसके मांँ-बाप बहुत दुखी होंगे, उसे ख़ोज रहे होंगे। तभी भूतों का राजा आकर रूपम से कहा, कैसा लगा तुम्हें हमारा लोक?अब तुम्हें यहीं रहना होगा। रूपम ने कहा- महाराज हमें छोड़ दीजिए मैं अपने मांँ- बाप के अरमानों को लेकर आया हूँ। अगर मैं नहीं लौटा तो मेरे मांँ-बाप टूट जाएंँगे। इस दुनिया में उनका मेरे सिवाय कोई नहीं है। भूत ने कहा, बेटा हम भी किसी को कष्ट नहीं देना चाहते हैं, लेकिन क्या करें, हम खुद कष्ट में हैं, यदि कोई मेरे सहित यहांँ पर रहने वाले सभी लोगों का रीति-रिवाज से दाह-संस्कार करके, क्रिया कर्म कर दे और इस अलमारी को भी हमारे साथ ही जला दे तो हमें मुक्ति मिल जाएगी और यह भूतों की दुनिया समाप्त हो जाएगी। यदि यहांँ पर हमारे नाम का एक मंदिर बनवा दिया जाए तो हम आगे से किसी के साथ भी दुष्कर्म नहीं होने देंगे जो भी दुष्कर्म करना चाहेगा हम उसको मार डालेंगे। तब रूपम ने कहा हे भूत राजा मैं आपसे वादा करता हूंँ कि, मैं आप सब लोगों को मोक्ष भी दिलाऊंँगा और आप लोगों के नाम का मंदिर भी बनवाऊंँगा। लेकिन आप हमें हमारे लोक में वापस भेज दीजिए। तभी भूतों का राजा एक भूत से कहा इसे ले जाओ मनुष्यों की दुनिया में छोड़ आओ। फिर अगले पल रूपम अलमारी में आया, अलमारी का दरवाज़ा खोला और अपने हॉस्टल के कमरे में जहांँ से गायब हुआ था वहीं पहुंँच गया। उसी के कुछ दिनों के बाद होली की छुट्टियांँ पड़ीं वह अपने घर अपने माता-पिता के पास गया और उसने अपने साथ घटित सभी घटना को बताया। उसके माता-पिता पहले तो यह सब करने को तैयार नहीं थे लेकिन रूपम ने कहा यदि आप ऐसा कर देंगे तो बहुत सारे लोगों को मोक्ष मिल जाएगा और बहुत सारी जिंदगियाँ बर्बाद होने से बच जाएंँगी। रूपम की बात माता-पिता को समझ में आ गई। वो लोग एक तांत्रिक को लेकर अलमारी में गए और अलमारी से भूतों की दुनिया में चले गए। तांत्रिक ने वहाँ फैले सभी शवों, हड्डियों, खोपड़ियों तथा खून के बर्तनों को इकट्ठा करवाकर जलवाया। सभी भूतों की आत्मा की शांति के लिए पूजा- पाठ किया ।उनका विधि- विधान से दाह- संस्कार कर अस्थियों को गंगा में प्रवाहित किया। इस तरह से भूतों की दुनिया समाप्त हो गई। और अंततः तांत्रिक तथा रूपम के माता-पिता मिलकर वहांँ एक भूत राजा का मंदिर बनवाए। इसके पुजारी स्वयं वही तांत्रिक हो गए। उस दिन के पश्चात आस-पास कहीं पर भी कोई दुष्कर्म नहीं हुआ। जो भी व्यक्ति किसी बालिका को गंदी नज़र से देखता रहस्यमय तरीके से उसकी तुरंत हत्या कर दी जातीऔर हत्यारे का कभी कोई पता नहीं चलता। धीरे-धीरे भूतों के देवता का मंदिर आस-पास के गांँवों में भी प्रसिद्ध हो गया और इस तरह महिलाओं का सम्मान बढ़ गया, महिलाएंँ सुरक्षित हो गईं।

सीख-हर आत्मा बुरी नहीं होती है। कभी-कभी उसे मज़बूरी में बुराई करना पड़ता है। अतः हमें बुराई के पीछे के कारण को जानकर उसे दूर करने का हर संभव प्रयास करना चाहिए। न उस बुराई का ढिंढोरा पीटना चाहिए न ही उससे डर कर भागना चाहिए।

साधना शाही, वाराणसी

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6 Comments

नंदिता राय

12-Feb-2024 04:40 PM

Nice

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Shnaya

07-Feb-2024 07:41 PM

Nice

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Gunjan Kamal

07-Feb-2024 06:42 PM

👏👌

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